उनके शर्माने का अंदाज़ अलग है,
कहीं खोल न देना यह राज अलग है !
किसे फिकर है रुसवाई की ज़माने में,
साहिल पर जो डूबा परवाज़ अलग है !
बस दो बोल प्यार के सुनना चाहते हैं,
मिले जो बोल अल्फाज अलग हैं !
गम में भी उनके मुस्कुराने की अदा,
ज़िन्दगी जीने का उनका साज अलग है!
हमने हालत से लड़ना छोड़ दिया,
उम्मीद के दामन में आग़ाज़ अलग हैं !
हितेश शर्मा
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