Search This Blog

Friday, December 9, 2011

!! किताबों के पन्ने पलट कर सोचता हूँ !!


१). किताबों के पन्ने पलट कर सोचता हूँ,
     यूँ ही पलट जाए जिंदगी तो क्या बात है !
     ख्वाबों में तो रोज मिलता है वो,
     वो हकीक़त में मिल जाये तो क्या बात है !

२).  कुछ मतलब के लिए आते हैं,
     बिन मतलब जो आये तो क्या बात है !
     क़त्ल करके तो सब ले जायेंगे दिल मेरा,
     कोई बातों से ले जाए तो क्या बात है !

३). जो शरीफों की सराफत में बात न हो,
     एक शराबी कह जाए तो क्या बात हो !
     अपने रहने तक तो खुसी दूंगा सबको,
     जो किसी को, मेरी मौत पर ख़ुशी  मिल जाए तो क्या बात है !
            

No comments:

Post a Comment